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“क्या हुआ , क्या हो रहा है और क्या होगा “

कृष्ण मलिक अम्बाला

कृष्ण मलिक अम्बाला

कविता

August 20, 2016

वैज्ञानिक रस में डूब कर
आधुनिक उन्नति खूब कर
वह (प्रकृति) का शासक बन बैठा
भौतिक सुखों की होड़ में
वाहनों की दौड़ में
वह पर्यावरण को दूषित कर बैठा
ऑक्सीजन के मारे
ये लोग अंधियारे
कैसे इससे बच सकते हैं
आपके सहयोग से
सरकार के सन्जोग से
इस समस्या से काफी हद तक बच सकते है
मोबाइल की क्रांति से
स्टाइल की भ्रान्ति से
हो सके तो इस पर काबू पाइए
संस्कारो की आवाज से
आधुनिकता के ताज से
सन्तुलन बना के जीते जाइए
कर्म की इस धरती पर
दुनिया ये टलती पर
बाद में पछताएगी
आने वाली पीढ़ी
आज के आलसियों को
दुत्कारती पायेगी
कर्म में मस्त रहना
निंदा से बच के रहना
सच्चे कर्मशील की पहचान होगी
सदुपयोग करके वक्त का
पाबन्द हो हर वक्त का
भविष्य में उसी हुनरमन्द की शान होगी
अभी चली है कलम कुछ दूर
बन रहा धीरे से सरूर
बहुत दूर तक जाना है
न तलवार के वारों से
केवल शब्दों के हथियारों से
विचारों को जन जन तक पहुँचाना है ।
आपके लाइक एवम् कमेंट और आलोचना के इंतज़ार में आपका
© के.एस. मलिक 10.03.2016

Author
कृष्ण मलिक अम्बाला
कृष्ण मलिक अम्बाला हरियाणा एवं कवि एवं शायर एवं भावी लेखक आनंदित एवं जागृत करने में प्रयासरत | 14 वर्ष की उम्र से ही लेखन का कार्य शुरू कर दिया | बचपन में हिंदी की अध्यापिका के ये कहने पर... Read more