मुक्तक · Reading time: 1 minute

क्या हुआ।जो नादानी में हमसे मुँह मोड़ बैठे

बेहयाई की भी न थी ,वो हया सारी छोड़ बैठे
बेफ़वाई की भी न थी,वो रिश्ते सारे तोड़ बैठे
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रफ्ता -2 ही समझेंगे वो हमारे अंदाजे इश्क़
क्या हुआ जो नादानी में हमसे मुँह मोड़ बैठे
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कपिल कुमार
16/01/2017

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