Oct 30, 2016 · कविता
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क्या सोचा है तुमने,

क्या सोचा है तुमने,
आज दिवाली क्यूँ मना रहे ।
ऐसी कौन सी विजय मिली,
जो दीप खुशी का जला रहे ।।
क्या सोचा है तुमने,

अरमान किसी के टूट रहे,
बिखर रहे हैं सपने ।
दुश्मन के नापाक इरादों से,
छूट रहे हैं अपने ।।
क्या सोचा है तुमने,

हां हम भी दीप जलाएगे
जब असल विजय हम पाएंगे
न होगी दहशत दिल में
ऐसी दिवाली हम मनाएंगे
क्या सोचा है तुमने,

– सोनिका मिश्रा

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Sonika Mishra
Sonika Mishra
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मेरे शब्द एक प्रहार हैं, न कोई जीत न कोई हार हैं | डूब गए... View full profile
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