Apr 18, 2020 · कविता

क्या लिखूं

क्या लिखूं मैं क्या लिखूं
अपने हिन्दुस्तान का
देश पे करज़ा बडा है अपने हर ज़वान का

पुलिस करमी चिकित्सक डटे है मैदान में
कौन क्या क्या कर रहा सब है उन के ध्यान में
हाथ ज़ोडे विनती करते ज़नता को समझा रहे
मनोरंज़न कर के भी उन को है मना रहे
रक्षा पूरी कर रहे भारत मां के सम्मान का
देश पे करज़ा बडा है अपने हर ज़वान का

बहुत सी विपदाओ को हम ने हराया है
करोना की तरह बहुत विदेशी को भगाया है
करम के साथ करते रहो स्मरण तुम भगवान का
देश पे करज़ा बडा है अपने हर ज़वान का

कुछ ज़ो नही रहे वो भी याद हम को आऐगे
कैसे उन के नातेदार उन को भूल पाऐगे
कुकृत्य सदा याद रहेगा हमे इस शैतान का
देश पे करज़ा बडा है अपने हर ज़वान का

समय और धन बडा नष्ट हुआ
अब आगे की तैयारी है
पुलिस करमी चिकित्सक कर रहे
अब हमारी बारी है

देशवासियों को अब स्वदेशी को अपनाना है
इस तरह भारत मां का करज़ हमे चुकाना है
इस तरह अवसर बने हम देश के अभिमान का
देश पे करज़ा बडा है अपने हर ज़वान का

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