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क्या लिखूं

Ankita Kulshreshtha

Ankita Kulshreshtha

कविता

May 20, 2016

प्यारा भारत वर्ष लिखूं
आजादी संघर्ष लिखूं
जाति धर्म में देश बंटा
कैसे मैं उत्कर्ष लिखूं ।।।

शोषण अत्याचार लिखूं
जीने का अधिकार लिखूं
आग धधकती है मन में
कैसे मैं श्रृंगार लिखूं ।।।

आंखों देखा हाल लिखूं
मानवता बेहाल लिखूं
कृषक मरें खलिहानों में
कैसे जग खुशहाल लिखूं ।।।

टूट रहे परिवार लिखूं
हर जन है अंगार लिखूं
नगर नगर वृद्धाश्रम हैं
कैसे शुभ संस्कार लिखूं ।।।

अंधकार पर जीत लिखूं
मनभावन संगीत लिखूं
सबको कुछ सिखलाए जो
ऐसा सुंदर गीत लिखूं।।।

ऊर्जा का संचार लिखूं
शांत सुखी संसार लिखूं
सभी धर्म सम्मानित हों
ऐसा मृदु व्यवहार लिखूं ।।।

स्त्री का सम्मान लिखूं
कन्या है अभिमान लिखूं
खिलता रूप प्रकृति का
कलियों की मुस्कान लिखूं ।।।

स्वच्छ नदी की धार लिखूं
बहती शुद्ध बयार लिखूं
कण कण रमतें हो ईश्वर
खुशियों का आधार लिखूं ।।

अंकिता

Author
Ankita Kulshreshtha
शिक्षा- परास्नातक ( जैव प्रौद्योगिकी ) बी टी सी, निवास स्थान- आगरा, उत्तरप्रदेश, लेखन विधा- कहानी लघुकथा गज़ल गीत गीतिका कविता मुक्तक छंद (दोहा, सोरठ, कुण्डलिया इत्यादि ) हाइकु सदोका वर्ण पिरामिड इत्यादि|
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