कविता · Reading time: 1 minute

क्या जरूरी था

क्या जाना जरूरी था,
गए तो ठीक क्या बताना
जरूरी था
संभाल लेता यूँ खुद को गुमनाम करके
क्या मोहब्बत में आना
जरूरी था
छोटी-छोटी बातों को
तुम जरिया बना लिए
फिजूल बातों का जरिया बनाना
जरूरी था
क्या जाना जरूरी था
तुम डरते थे कल को लेकर
क्या आज गँवाना
जरूरी था
तुम कहते थे,बस तुम ही हो सब कुछ
क्या यू बदल जाना
जरूरी था
क्या जाना जरूरी था

Abhishek ‘प्रबल’

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