क्या छोड़ आए हैं।

बैठ पल दो पल उनकी,
पनाहों से जो आए हैं,
न जाने कितने ही,
हसीन ख्वाब,
उनकी आँखों में,
छोड़ आए हैं।

जब उठे थे,
उनके पहलू से,
साँसों में,
रवानगी साथ,
एक दीवानगी,
छोड़ आए हैं।

आने को कह कर,
बस उनके पास,
अपने इंतजार के,
लम्हें छोड़ आए हैं।

उनकी बाहों में सिमट,
कई सपने बुने,
जाते -जाते,
उन सपनों की,
निशानी छोड़ आए हैं।

नजर से नजर मिली,
कई जज्बात जागे,
उनकी साँसों में,
अपनी महक,
छोड़ आए हैं।

रचनाकार…..
(Veena pawan mehta)

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