मुक्तक · Reading time: 1 minute

क्या गुलाब…

क्या गुलाब गुलाब लगा रहा तुमने “सागर”
जाओ सारे जहाँ के गुलिस्तां तुम्हारे नाम करते हैं
किसी फूल से बराबरी करूं तो तौहीन होगी तेरी
चल हटा हम ये पूरी कायनात तेरे नाम करते हैं

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