कविता · Reading time: 1 minute

~~~ क्या कहा ?? भूल जाऊं ~~

जरा ! अपने मन से
पूछ लो तो, कि
तुम को कैसे भूला दूं
कितने ही सपने बुने थे
साथ साथ मिलकर
क्या उन सब को मन से
हटा दूं, प्रिये
क्या सोच् कर कहा
तुम ने की भूल जाऊं
हर पल जिस के
बिना न गुजरा समय
बिन कहे, सब कहाँ
दिल ने,
आवाज के बिना जो
सुना मन ने,
बिना आहट के
समझ लिया दिल से,
वक्त आने पर
सब जाना तुमने,
आज , यह कैसा कहा
तुमने कि, मैं
तुमको भूल जाऊं
किस बात का भ्रम
हुआ अब तुम्हारे मन में
क्या दिल के आयी
कुछ बात यूं तुम्हारे
इस सुने दिल में
कितनी गहराई से
प्रेम किया तुमने,
आज यह कह कर
सब कतम कर दिया
की तुम को भूल जाऊं,
जरा , फिर से सोचना
और खुद से मंथन करना
की, क्या सच में भूल जाऊं
तुमको इस जनम क्या
हर जन्म जन्म में ???

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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