.
Skip to content

कौन हो तुम!

मुकेश कुमार बड़गैयाँ

मुकेश कुमार बड़गैयाँ

कविता

July 6, 2017

यह कौन है ?जो मौन सतत
पर बोलता है अनवरत!
कौन है मन के गहरे कोने में
अदृश्य है !
पर सब देखता है
निरंतर ,सदा चिंतन में
यह कौन है,प्रवाह में है
कभी प्रशांत है ,मार्गदर्शक ऋषि बने
कभी प्रेरणा परोसता है
ध्यान में जब मैं अनंत को खोजता
यह कौन है जो साक्षी है!
मेरे हृदय में है
कहां है ,गर यहाँ नहीं
कहीं कोई भ्रम तो नहीं!
जहाँ चलूँ तू वहीं चले
जहाँ थमूं मैं तू ेवहीं
थमे
क्या तू ही मेरा मूल है
तू बीज है
मैं अंकुरण तेरा!
तू सदा साथ है
मेरे हर कर्म का साक्ष्य है, हे सखा!
घने तमस में तुम्हे खोजता हूँ
टटोलता हूँ!
कौन हो तुम ,क्यों मौन हो तुम?

मुकेश कुमार बड़गैयाँ “कृष्णधर द्विवेदी”
mukesh.badgaiyan30@gmail.com

Author
मुकेश कुमार बड़गैयाँ
I am mukesh kumarBadgaiyan ;a teacher of language . I consider myself a student & would remain a student throughout my life.
Recommended Posts
मैं कविता करूँ, तू हँसता रह...
???? मैं कविता करूँ तू हँसता रह..... ? मेरी कोई भी गलती पर बेझिझक तू टोकता रह.... ? मुद्तों से बैठकर मुझ में मुझे तू... Read more
                ऐ ज़िन्दगी  
                ऐ ज़िन्दगी   देखे तेरे कई नज़ारे, साथ तेरे कई पल है गुज़ारे, बिछड़ जाएगी तू भी एक... Read more
जीवन भी तू
मुझसे खपा न होना कभी तू जीवन भी तू दुनिया भीै तू तू ही तो खुशियां देती है जान मेरी  तू चाहत भी तू बचपन... Read more
तेरी यादें
तेरी याद में कुछ इस कदर मैं खो जाता हूँ, कभी कभी तो मैं रोते रोते सो जाता हूँ। तू मिले ना मिले नहीं परवाह... Read more