गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

क्या पाया और क्या खोया …

जब भी मेरा फ़साना, ज़माना तुम्हें सुनाएगा
हर लम्हा तुम्हें, मेरे इर्द-गिर्द ही पाएगा…

जिंदगी कुछ ना थी, सिवाय एक कशमकश के
बीत जाने पर तुम्हें, कौन ये समझाएगा…

सवाल था कि क्या पाया और क्या खोया
जवाब में तुम्हें, मेरा इंतजार याद आएगा…

वक्त जब करेगा, मेरे हासिल का हिसाब
तुम्हें जरूर मेरा, खाली दामन नज़र आएगा…

ना लाना मांँगकर चिरागों से रोशनी ‘अर्पिता’
वरना वो शख्स अँधेरों – सा क़हर ढाएगा…
-✍️देवश्री पारीक ‘अर्पिता’

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नमस्कार... मैं देवश्री पारीक 'अर्पिता' समर्पित भाव से हिन्दी शिक्षिका (M.A. In Hindi, M.A. In History, B. Ed, 'O' Level From DOEACC Society, Delhi ), कवयित्री हूँ। पूर्व में काव्य-पाठ…
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