को-को

को-को

बचपन में को-को
मेरी मनपसंद चीजों को
एका-एक
बिलकुल मेरे सामने से
कर देती थी गायब
कहते थे परिजन
फलां चीज को
ले गई को-को

नामुराद को-को
अब भी नहीं छोड़ रही पीछा
आ जाती है अक्सर
न्यूज चैनल्स पर

भूखमरी, गरीबी, बेरोजगारी, पलायन
पुलिसिया उत्पीड़न
जीवन रक्षक उपकरणों की
कमी सहित
कितने मद्दों को
कर जाती है गायब

को-को बचपन की बात
अलग थी
अब तो रहम कर

-विनोद सिल्ला©

1 Like · 7 Views
टोहाना, जिला फतेहाबाद हरियाणा
You may also like: