कविता · Reading time: 1 minute

कोशिश

कोशिश…
बहुत करती हूँ कि
अपनी सभी ख्वाहिशो को
छू लू आसानी से
पास सी नजर आती हैं
ख्वाहिशें मेरी
जैसे ही पास आने की
कोशिश…
करती हूँ मै कि पास हूँ
न जाने क्यूं ओर भी
दूर होती जाती हैं
क्यो होती जाती हैं दूर
ख्वाहिशें मेरी
दूर बहुत दूर
कोशिश…
करती रहूंगी कोशिश
लगातार बार बार
यूं ही अपनी सामर्थ्य से
शायद मिले मुझे
सारी ही सोची हुई
ख्वाहिशें मेरी
ओर ये
कोशिश…
……….???

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पुस्तकालयाध्यक्ष ग़ाज़ियाबाद में पिछले 22 वर्षों से पब्लिक स्कूल में कार्यरत। लेखन- साहित्य रचना एवं अनेक समाचार पत्रों में लेख,कविताएं प्रकाशित कृतियां- 1-काव्यमंजूषा 2-मातृशक्ति 3-शब्दोत्सव 4-महापुरुष 5-काव्य शब्दलहर 6-अम्बेडकर जीवन…
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