Jan 13, 2021 · कविता
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कोरोना

कोरोना

कोरोना को हरा कर है आया
दिन सुहाना, आज दिन आया

आई लोहड़ी है, छाई खुशियाँ
दिखती हर सूरत मनमोहनी यहाँ

कोरोना ने बुझा रखे थे दीपक
चिराग दिलों के बुझे थे दीपक

उन सब में लौ फिर से भरने आई
आज यहाँ लोहड़ी, खुशियाँ छाई

मुश्किलों का सामना कर कितना
सजी लोहड़ी, मौसम सुहाना आया

रेवडी, गज्जक, मुगफली, याद दिलाने
आई लोहड़ी खुशियाँ, सीरत, याद दिलाने

शीला गहलावत सीरत
चण्डीगढ़

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Sheela Gahlawat Seerat
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सपने देखना कैसे छोड़ दूं सजाये अरमान कैसे तोड़ दूं हिन्दी, हरियाणवी में ग़ज़ल, गीत,... View full profile
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