कविता · Reading time: 1 minute

कोरोना

चारों तरफ सन्नाटा पसरा उफ! ये कैसी बीमारी है?
ब्रिटेन में दूसरा स्ट्रेन फिर लाॅकडाउन की तैयारी है।
कोरोना का हाहाकार मचा सारा संसार लाचार हुआ,
इन्सान समझ ना पाया वो कब, कैसे बीमार हुआ?
सैनेटाईजर, मास्क, सफाई ये ही हथियार बने, कोरोना के खिलाफ पुलिस, डॉक्टर, नर्स पहरेदार बने।
डटे रहे परिवार छोड़कर कोरोना युद्ध में जो,
नमन उन्हें मेरा शत्-शत् जीते जी बुद्ध बने वो।
आखिर में वैज्ञानिकों की मेहनत रंग लाई,
कोविशील्ड, कोवैक्सीन बनाने में सफलता पाई।
भारतीय संस्कृति ने अपना परचम फहराया,
योग, आयुर्वेद, नमस्कार को सबने अपनाया।
पर कोरोना के कुछ सकारात्मक प्रभाव हुए,
इंसानियत पर बढा भरोसा प्रकृति में बदलाव हुए।
महंगी शादियाँ सादा आयोजन में बदल गई,
रिश्तों की कीमत समझी अहंकार की बर्फ पिघल गई।
ऑनलाइन पढ़ाई ने कंप्यूटर युग साकार किया,
मोबाइल का महत्व विद्यालयों ने भी स्वीकार किया।
आओ स्वच्छता, जागरूकता समाज में फैलाएँ,
कोरोना को हरा विश्व विजयी दीप जलाएँ।

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