Dec 15, 2020 · कविता

कोरोना

अच्छे खासी ज़िन्दगी में कुछ दिन ऐसे आये ।
देश हो गया बंद ओर सब हाय हाय कर घबराएं ।।

हर घर में थी चर्चा उसकी, और टीवी में हर दम समाचार ।
नाम कोरोना बताया उसका , था ना जिसका कोई इलाज ।।

पथ मे पथिक भटक रहे थे , भटक रहे थे सब मजदूर ।
अपने घर से थे जो निकले कमाने, थे वो घर से कोसो दूर ।।

है चीन तूने ये कैसा वायरस छोड़ दिया ।
घबरा गया देश सारा , सबका धंधा पानी छुट गया ।।

लगे देश के सभी वैज्ञानिक , दवाई इसकी बनाने में ।
पर मिली नहीं कोई सफलता, अब तक कि खोज में ।।

दो गज दूरी , मुंह पर माक्स , हर दम सेनेटाइजर हाथो को करते है ।
अभी तक के लिए यही इलाज है जो हम सब अब करते है ।।

जीत ही जाएंगे कोरोना से ये जंग भी , और कितनी ही जंग भी तो जीती है ।
कोशिश करने वालो की कभी हार नहीं होती ,ये कहावत भी कहा झुटी है ।।

प्रतीक जांगिड़
भवानी मंडी ( राजस्थान )

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लेखक हूं या नहीं, नहीं जानता , हा पर चले आते है कुछ शब्द लबो...
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