कविता · Reading time: 1 minute

कोरोना

एक अदृश्य आफत ने, हमको बहुत डराया है,
कोरोना नाम का ये प्राणी, भारत देश में आया है ।।
सिमट गये है घर तक अपने, ना कही आना ना जाना है ,
दोस्तो से पूछो हाल वो कहते है, वहीं रह मेरे घर नही आना है ।।
कभी जो आये खाँसी, तो लगता है की,कोई जुल्म मैने कर डाला है,
वो दोस्त भी दग़ा दे गये, जिन्हे ‘वीमल’ खिला मैने पाला है ।।
लॉक डाउन है देश मे पूरे, पत्नियाँ अब कुछ सुकून में है,
पुरुष बेचारे को अब करना साफ़ खुद के घर का नाला है।
दोस्तो से पूछा की कोई काम है क्या,
कहते है, काम कर तेरा, ऊपर वाला ही अब रख्ववाला है ।।
जैसे तैसे पहुचे किसी के घर,एक संदेश लिखा था उसके दर।
अपने घर जा भाई, तस्वीर पर हमे नही चढानी माला है ।।

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