कोरोना है जिसका नाम।

शक्ल है ना कोई, धुंधली है पहचान
मौत के रूप में आ रहा अज़ीब मेहमान
अब तो सम्भल जाओ, ना बनो नादान
हल्के में मत लो, कोरोना है जिसका नाम।

लग गए ताले पूरे विश्व पर, सब बंद
रुक गया पूरा संसार जैसे, सब ठप्प
ना कोई गतिविधियाँ, ना ही हलचल
कोरोना का रखा पूरे विश्व ने मान।

ना जाति, ना धर्म, ना अमीरी-ग़रीबी देखे
मास्क, सैनिटायज़र, दो गज की दूरी रखें
नहीं तो ना कफ़न, ना नसीब हो कंधे चार
सच कोरोना है तबाही का ही दूसरा नाम।

उपचार नहीं, तो लापरवाही कभी ना करें
वैक्सीन नहीं, तो सावधानी अवश्य बरतें
रहें सतर्क, अपनी मनमानी ना करें निराधार
कोरोना डटे खड़ा है निधान हाथ को थाम।

फिर टूटेगा ताला, सजेगी रौनक़ चहुँ ओर
फिर उगेगा नव सूरज, खिलेगी नव भोर
गले मिल बाटेंगे ख़ुशी-ग़म और त्यौहार
हौंसले से कोरोना का मिटेगा नामो-निशान।

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ना मैं लिखती देश दुनिया सत्ता पलटने को ना ही मीरा सी प्रीत ना महादेवी...
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