Jan 7, 2021 · कविता
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“कोरोना” तू भी जा

गया तेरा साथी बीस कोरोना तू भी जा
अब ना कर इतनी रीस कोरोना तू भी जा

अर्थव्यवस्था कर दी कचरा
सबका जीवन बिखरा बिखरा
तेरी वजह से हाल हुआ ये
अपना ही अपने को अखरा
गया तेरा न्यायधीश कोरोना तू भी जा
अब ना कर इतनी रीस कोरोना तू भी जा

तुझको लाज ज़रा न आई
अच्छी इतनी नहीं ढिठाई
अब गया पानी सिर से ऊपर
तेरी वजह से विपदा आई
तुझे मारेगा इक्कीस कोरोना तू भी जा
अब ना कर इतनी रीस कोरोना तू भी जा

जीने दे अब और सता ना
कुछ तो अब तू रहम जता ना
तेरे कारण बन्द हुआ सब
कब जाएगा यार बता ना
उठे जिया में टीस कोरोना तू भी जा
गया तेरा साथी बीस कोरोना तू भी जा।
सविता गर्ग “सावी”
पंचकूला (हरियाणा)

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