कविता · Reading time: 1 minute

कोरोना गीत

देश वासियो, बहिन भाइयो, मोदी का ऐलान,
आप मानिए, “अगर जान है तो ही रहे जहान”|
भारत ही क्यों, सब देशों में घमासान है,
कोरोना के कारण सब ही परेशान हैं |
सुरसा जैसा रूप बढाता जाता निशदिन,
आज चिकित्सक दल ही सच में समाधान है |
हाथ जोड़ कर विनती करते, गायें हम सहगान,
सात फीट की दूरी रक्खें, यह ही बने विधान |
केवल छूने मात्र किसी को, हमें सताए,
नहीं दवा है ऐसी कोई, हमें बचाए |
आज सभी उद्योग बंद हैं, हम हैं भीतर,
कब तक घर में रह सकते हैं,कोई बताये,
घर में रहिये, बात मानिए, हम सब एक समान,
“कोरोना” तो हार जायगा, होते क्यों हैरान |
शासन के निर्देश मान्य हैं, रहें सुरक्षित,
सभी एक हैं, भारत में हैं सभी संगठित |
फिरभी हम असहाय,ढूढना हल हमको ही,
आतंकी है, कोरोना को करें पराजित |
हो सहयोग आपका पूरा, स्वयं आप भगवान,
पालन करना निर्देशों का, तभी आपका मान |

Competition entry: "कोरोना" - काव्य प्रतियोगिता
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डॉ. हरिमोहन गुप्त को मैंने निकट से देखा है l 81 वर्ष की आयु में भी उनमें युवा शक्ति है l अभी भी चार घंटे प्रतिदिन मरीजों को देते हैं…
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