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*कोरोना गजब ढा गया तू*

ओ कोरोना ओ कोरोना, गजब ढा गया तू,
सोचा था न कभी किसी ने, जगत छा गया तू !
चला चाइना चाल चुलबुली,
मची विश्व में अजब खलबली !
हर देश जगा गया तू…!
ईराक-ईरान-कुवैत-गुयाना,
समुद्र पार या सिंधु मुआना !
प्राण खा गया तू…!
रूस-अमेरिका-भारत-इटली,
सबकी कँपा गया तू पिंडली !
कहर ढा गया तू…!
हालत देख अब हो गई खस्ता,
सबकी बिगड़ गई अर्थव्यवस्था !
सुख-चैन ले गया तू….!
दो गज दूरी मास्क लगाना,
दूर नमस्ते न हाथ मिलाना !
जन-जन को सिखा गया तू..!
बहुत हुआ तुम जल्दी जाओ,
अब दुनिया को और न सताओ !
‘मयंक’ कह रहा यूँ …!
स्वरचयित कृति : के.आर.परमाल ‘मयंक’

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के.आर. परमाल 'मयंक'
के.आर. परमाल 'मयंक'
पिपरिया (पचमढ़ी)
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पूरा नाम - श्री खरगराम परमाल 'मयंक', पिता जी स्वर्गीय श्री कोदूलाल, ग्राम - धारपुरा,...
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