Dec 15, 2020 · कविता
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“कोरोना का है वार”

कोरोना का है वार, चारो तरफ हाहा कार।
ऎसी महामारी ,सब हुऐ लाचार।
मास्क और सैनिटाइजर, लिए हथियार।
करते एक दूसरे से दूरी बरकरार।
कोरोना का है वार, चारो तरफ हाहा कार।
अपने घर में केद हुआ ,छोटा बड़ा हर इंसान।
बच्चे बूढ़े खतरे में ,लोग हुऐ परेशान।
मौत दिन पे दिन बड़ रही, डॉक्टर बने पहरेदार।
कोरोना का है वार, चारो तरफ हाहा कार।
ऎसी महामारी ,सब हुऐ लाचार।
पुलिस भी करती ,अपनी लाठी का इस्तेमाल।
फिर भी उल्टी होती ,सारी की सारी चाल।
लोकडाउन का बोलबाला,मजदूर हुऐ शिकार।
संघर्ष करती, मोदी सरकार
कोरोना का है वार, चारो तरफ हाहा कार।
ऎसी महामारी ,सब हुऐ लाचार।

नाम – रीतू सिंह
ग्राम – विशुनपुरा, तुलसी पट्टी
ब्लाक – तमकुही
जनपद – कुशीनगर

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रीतू सिंह
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रीतू सिंह सहायक अध्यापिका प्राथमिक विद्यालय कोइंदी बुज़ुर्ग राय टोला, ब्लाक-तमकुही, जिला-कुशीनगर। उत्तर प्रदेश पिता... View full profile
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