Jan 14, 2021 · कविता

कोरोना का हास्य रुप

कोरोना दादा ने, बहुत कोहराम मचाया है ।
बच्चे बूढ़े युवा को ,नाको ताले चने चबवाया है ।

जिंदा को मुर्दा ,मुर्दे को गयाब करवाया है।
बड़े -बड़े को भी घर मे, कारावास कराया है।

मां-बाप जो ना कर सके, इस ने वह सबक सिखाया है ।
प्रेमियो को दूर करा, सोशल डिस्टेंसिंग अपनाया है।

इंसानों का समझ है पढ़ता ।
इसने तो मध्यप्रदेश में ,कुर्सी को भी पलटाया है।

कोरेना बीमारी किसको पता था देश में
इसलिए अमिताभ को भी ड्यूटी पर लगाया है ।

लॉकडाउन में पुलिस से, मालिश चौराहे पर करवाई है ।
दुकानें खोली जिसने , मुक्के लाते उसने भी तो खाई है ।

राशन जमा हुआ महलों में
गरीब ने तो लॉकडाउन में भी ,हवा खाई है ।

डॉक्टर से जो भी उलझा ।
उसकी किडनी भी साफ कराई है ।

सैनिटाइजर की तो, बात न करना ।
रगड़ -रगड़ के हाथों की चमड़ी पीली नीली कराई है।

दुनिया की आधी जनसंख्या को, चुटकी में झड़ाई है ।
शुक्र हो भैया अखबारों का, दुनिया की खबरें उसी ने हमें बताई है।

देश की अर्थव्यवस्था कहां है ,नहीं पता ।
हमने तो घर में 2 रुपए के लिए ,मां से चप्पल खाई है ।

काम धंधे ठप हुए ।
बस राज्यश्री गुटके ने की, कमाई है ।

मास्क लगा के ,चेहरे पे ।
इंसान की सच्ची सूरत दिखाई है।

कोरेना भी डरा हुआ है ।
भारत में ,बर्ड फ्लू नाम की बीमारी आई है।

कोरेना दुद्दू अभी भी है, लोग भूलते जा रहे
21 आ गया तो मास्क उतार सब ,गले क्यों मिलते जा रहे ।

प्रकृति मां भी हेरा है ,मुझ पर जुल्म ढाते-ढाते ,
मेरे बच्चों यह तुमने अपने साथ क्या कर लिया ।
नई नई बीमारी लाके क्यों अपना गला मसल लिया ।

वैक्सीन भी धीरे- धीरे, अब अस्तित्व में आ रही।
बचे हुए हैं जो ,मुझे लगता है उनकी भी तारीख नजदीक आ रही।

अब मैं ज्यादा नहीं बोलूंगा, कोरेना दादा मुझ पर नजर तीखी करा आए हैं।
मास्क सैनिटाइजर का तोता रखा है ,इस कारण शायद मुझ तक अभी न आए हैं।

और हमने यह तराने सोच समझ कर गाये हैं ।
अब समझो भावनाओं को ,क्योंकि हर चीज खुल कर ना हम बतलाए हैं।

हर्ष मालवीय
बीकॉम कंप्यूटर तृतीय वर्ष
कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय हमीदिया
बी यू भोपाल मध्य प्रदेश

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