"कोरोना"बनाम"क्यों रोना"

“कोरोना” बनाम “क्यों रोना”

आए थे तुम, धरती पर रुलाने सकल संसार को,
ये हट थी तुम्हारी, हिला दोगे मानव परिवार को।
पर करोना जी ! भूल हो गई तुमसे,
मानव को तुमने कमज़ोर समझ लिया।
बहुतों की ज़िंदगी गई,
वो कभी तो जाने वाली थी
बहुतों को दुविधा हुई ,
पर तुमने दया धर्म सीखा दिया ।
तुमने हमें घरों में बिठा दिया,
पर अनजाने में,अपनों से मिलवा दिया ।
फास्ट फूड हो गए बंद,
शुद्ध खाना सिखा दिया ।
हो गये थे जो बेनकाब ,
उनको नकाबों में ला दिया
वाह करोना जी वाह,
तुमने सबको जीना सिखा दिया।

✍वैशाली रस्तौगी
जकार्ता, इंडोनेशिया
15.12.2020

Voting for this competition is over.
Votes received: 434
104 Likes · 225 Comments · 2655 Views
मुझे हिंदी में काफी रूचि है. विदेश में रहते हुए हिन्दी तथा अध्यात्म की तरफ...
You may also like: