Skip to content

कोतवाली की सैर

राहुल आरेज

राहुल आरेज

कविता

January 9, 2017

“कोतवाली की सैर”

लेखक:राहुल आरेज

एक दिन हम यू ही घूमने के बहाने हम पहुच गये कोतवाली,
जैसे ही हम गेट पर पहुचे मिल गई खाकी वर्दी वाली,

खाकी वर्दी वाली ने हमको देखकर पुलिस वाला रौल दिखाया ,
वो वोली कौन है तू ?ये सब सुनकर मेरा भी सिर चकराया,

हम वोले हम आम इंसान है,
वो वोली मुझे लगता सरकारी मेहमान है,

कर जोडकर मैने उस देवी से माँगी इजाजत अन्दर जाने की,

वो वोली अरे आम इंसान तुझे हर वक्त जल्दी क्यों रहती है जेल रोटी खाने की,

मै वोला म्हारी माई या पेट भूख म्हानै यहाँ खिच लाई,

वो वोली म्हारा माथा मत खा मे तो पहले ही बलम से लडके आई,
जैसे ही अदंर पहूचे तोद वाले सिपाही ने जोर से विसाल बजाई ,
और वोले अदंर क्यों घुसा आ रहा है क्या ये पुलिस तेरे बाप की लुगाई,

Share this:
Author
राहुल आरेज
राहुल मीना

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you