कविता · Reading time: 1 minute

कोढ़

कोढ़ छुपाने का प्रयास कहां कभी सफल हो पाया है
हाय … कोढ़ भला कब दुनियां से छुप पाया है
सड़ गल के बदन का हिस्सा अक्सर ही
जमीं पे गिरा बिखरा ही नज़र आया है
बदबू ऐसी की सांसों में भी जहर सा उतर आया है
~ सिद्धार्थ

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मुझे लिखना और पढ़ना बेहद पसंद है ; तो क्यूँ न कुछ अलग किया जाय... लड़ने के लिए तलवार नही कलम को हथियार किया जाय थूक से इतिहास नही लिखा…
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