Jan 31, 2020 · मुक्तक
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कोई मंदिर बनाता है….

कोई मंदिर बनाता है, कोई मस्जिद सजाता है
कोई पत्थर चलाता है कोई गोली चलाता है।
ये कैसी आग है फैली जहां मे इस कदर भाई
न कोई जी ही पाता है न कोई मर ही पाता है।

कभी मंदिर को लड़ते हैं, कभी मस्जिद को लड़ते हैं
न जाने क्यूँ यहाँ हम तुम बिना कारण झगड़ते हैं।
न तुम हो आसमां के और ना हम ही तली के हैं
तो क्यूँ इस चार दिन की जिन्दगी पे हम अकड़ते हैं।
जटाशंकर”जटा”
३१-०१-२०२०

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Jatashankar Prajapati
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ग्राम-सोन्दिया बुजुर्ग पोस्ट-किशुनदेवपुर जनपद-कुशीनगर उत्तर प्रदेश मो०नं० 9792466223 --शिक्षक ---पत्रकार ---कवि View full profile
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