Skip to content

कोई तो है मैरा

शक्ति राव मणि

शक्ति राव मणि

कविता

February 4, 2017

जब लगा की कोई नही है मेरा
तब उठा और देखा
वो तारा भी मेरा,और चाँद भी मेरा
तु उठी सुबह धूप भी तेरी और आकाश का सूरज भी तेरा.

संभावनाओ मे जीवन कट रहा है
कि कोई तो हो मेरा
बस फिर एक नजर मिली उनसे और लगने लगा कोई तो है मेरा
यकीन हे हमको देखती तो तुम भी हो हमे, पर क्या बात है जो कहती नही हमे.

सब कुछ है मेरा
वो धूप भी मेरी और आकाश का सूरज भी मेरा
हो जाती हूँ रात मे तन्हा
कि कोई नही अब मेरा
पर तेरी तरह ना-समझ नही
ओ-पागल! वो रात भी तेरी और रात का अंधेरा भी तेरा
वो चाँद तेरा और उस पर सूरज मेरा
अकेला न समझ खुद को
मैै डूबकर दिन खत्म करती हूँ
क्योंकि रात तेरी ओर वो निकलने वाला तारा तेरा
अब तो न बोल
कि कोई नही है मेरा.

अब समझा मै
तु डूबे तो मै हुँ रात
मै डुबूँ तो तू है दिन
मिलना मुश्किल है
पर सवेरा हूँ मै तैरा
और तू शाम है मैरी

अब लगता है
कोई तो है मैरा
वो चाँद तैरा और सूरज मेरा………

Share this:
Author
शक्ति राव मणि
नाम:- शक्ति राव

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you