कोई कह दे इन हवाओ को.... !

“कोई कह दे इन हवाओ को,
कि मेरा चाँद बहुत ही शर्मीला हैं,
इतनी कोशिश ना करो………
उसकी चुनरी को उडाने की……. !
कोई कह दे इन हवाओ को !

उसकी आँखों को तलब है,
मेरी आँखों मे डूब जाने की,
इतनी कोशिश ना करो……
उसकी पलकों मे तिनका लाने की… !
कोई कह दे इन हवाओ को !

मुझको आदत है,
उसके केशुओ को सहलाने की ,
इतनी कोशिश ना करो……
उसके केशुओ को उलझाने की…… !
कोई कह दे इन हवाओ को !

उसके चेहरे का नूर,
दिल की दास्ताँ मुझे कहता हैं.,
इतनी कोशिश ना करो…..
उसे सताने की……. उसको सिद्दत से रुलाने की……. !
कोई कह दे इन हवाओ को !

उसे इजाजत हैं,
मुझे ख्वाबों मे सताने की……
इतनी कोशिश ना करो…… !
मुझे नींद से जगाने की……. !
कोई कह दे इन हवाओ को……. !!””

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