Jan 2, 2019 · कविता
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कॉलेज है!!

कॉलेज है
कर्मी है शिक्षक है
है छात्र छात्रा
शिक्षा फरार है

कॉलेज है काउंटर है
स्टाफ है ठंड है
धूप सेंक रहे है

बारह हजार छात्र है छात्रा है
लेते नामांकन भरते फॉर्म
फिर हो जाते गायब है

नेता है परेता है
लगते छपते नारे है
इनके पौ-बारह है

शिक्षक है
गिनती के दस बारह
कुछ पढ़ाते कुछ गायब
कुछ नारे लगवाते है

कुछ को शर्म है
कुछ को भ्रम है
बाकी राजनीति में बेदम है

ढोल है पोल है
ढेरो झोल है
झोलो के खुलते पोल है

कई गुट है फुट है
फटते फटाते इज्जत है
इस खेल में सब लहालोट है

भारत माता की जय है
इंकलाब जिंदाबाद है
नारे आबाद है
शिक्षा तबाह है छात्र बर्बाद है

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रीतेश माधव
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