मुक्तक · Reading time: 1 minute

कैसे हैं दिन कैसी अजीब राते हैं

कैसे हैं दिन , कैसी अजीब रातें हैं
चाँद तारे भी गुमशुम करते बाते है
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ऐ सर्द हवा इधर से बह तो जरा
तू जो आती है तो वो करीब आते हैं
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कपिल कुमार
04/01/2017

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