कैसे लोग चला देते हैं बच्चों पर शमशीर

कैसे लोग चला देते हैं बच्चों पर शमशीर
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सोच सोच कर मन यह मेरा होता रोज अधीर
कैसे लोग चला देते हैं बच्चों पर शमशीर

कैसे उसको पाला होगा
पल पल उसे सम्हाला होगा
बिना खिलाये माँ के मुँह तक
जाता नहीं निवाला होगा
हल्की सी भी चोट लगे तो माँ को उठती पीर-
कैसे लोग चला देते हैं बच्चों पर शमशीर

सोच सोच मुस्काना उसका
गोदी में छुप जाना उसका
कितना तड़पायेगा हर पल
आँगन में तुतलाना उसका
जो आँखों का तारा था वह बेदम हुआ शरीर-
कैसे लोग चला देते हैं बच्चों पर शमशीर

लोगों ने जब मारा होगा
उसने मुझे पुकारा होगा
आगे पीछे दाएँ बाएँ
चारों तरफ़ निहारा होगा
उसे छोड़कर मेरा सीना देते चाहें चीर-
कैसे लोग चला देते हैं बच्चों पर शमशीर

संस्कारित परिवेश नहीं है
न्याय बचा कुछ शेष नहीं है
हत्यारे सब घूम रहे पर
फाँसी का आदेश नहीं है
यह कैसी हम देख रहे हैं भारत की तस्वीर-
कैसे लोग चला देते हैं बच्चों पर शमशीर

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- ०८/०६/२०१९

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