कैसे माँ पर लिख पाऊँ

मैं शब्द कहाँ से लाऊँ,
कैसे माँ पर लिख पाऊँ |

माँ प्रकृति की अद्भुत घटना,
ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ रचना |
माँ ईश्वर की अभिव्यक्ति है,
माँ मेरी जीवनी-शक्ति है |
माँ ने ही शब्द दिए मुझको,
कैसे उनको लौटाऊँ,
कैसे माँ पर लिख पाऊँ l

सब कुछ इस जग में संभव है,
पर माँ बिन सृष्टि असंभव है |
धरती से आकाश तलक,
माँ ! माँ ! का ही होता गुंजन |
माँ ही गीता का प्रणव-शब्द,
माँ है, धरती पर है जीवन |

माँ गीता, गंगा, गायत्री,
सीता, अनुसुइया, सावित्री |
माँ की असीम क्षमताओं को,
शब्दों में बाँध न पाऊँ,
कैसे माँ पर लिख पाऊँ l

– हरिकिशन मूंधड़ा
कूचबिहार

This is a competition entry

Competition Name: साहित्यपीडिया काव्य प्रतियोगिता- "माँ"

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