कैसे बता मानू

मेरे होने न होने का नहीं जब फ़र्क ही कोई
तुझे अनमोल फिर ऐ ज़िंदगी कैसे बता मानूँ
बदल जाती है पल भर में बहुत ही स्वार्थी दुनिया
नही दुश्मन हैं ये लेकिन इसे कैसे सखा मानू

11-08-2020
– डॉ० अर्चना गुप्ता

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