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कैसे खड़े हों जब मिला आधार भी नहीं

Dr Archana Gupta

Dr Archana Gupta

गज़ल/गीतिका

December 18, 2017

कैसे खड़े हों जब मिला आधार भी नहीं
कोई सहारा देने को तैयार भी नहीं

कोई नचा सके हमे कठपुतली की तरह
इतने हुए हैं हम अभी लाचार भी नहीं

है कश्मकश अजीब सी ले कैसे फैसला
इंकार गर नहीं है तो स्वीकार भी नहीं

पथराई इंतज़ार में आँखें भी इस तरह
अब बहती इनसे आँसुओं की धार भी नहीं

होगी निरोगी काया रहेगा प्रसन्न मन
योगा से होंगे तुम कभी बीमार भी नही

रखते सदा नकाब वो चेहरे पे ‘अर्चना’
तरसा दिया हमें दिये दीदार भी नहीं

18-12-2017
डॉ अर्चना गुप्ता

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Author
Dr Archana Gupta
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख... Read more
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