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अधूरी हसरतें

है उम्र पछपन लेकिन दिल में
अभी भी उसके तड़पन है
देखता है किसी हसीना को जब
बढ़ जाती उसकी धड़कन है।।

कोशिश करता है दिल पर
अपने काबू रखने की वो
लेकिन मचल जाता है दिल उसका
मिलता है जब किसी हसीना से वो।।

कर न पाया जवानी में जो अभी
भी करने की तम्माना रखता है
मिले कोई हसीना तो उसे दिल
में बसाने की तम्मना रखता है।।

ढूंढती रहती है आंखें उसकी
आज भी खूबसूरती हर कहीं
निहारता रहता है बाज़ार चौराहे में,
दिख जाए हसीना उसे जब कहीं।।

हो जाना कभी बस में तो वो
खड़े रहना ही पसंद करता है
भा जाता है उसकी नजरों को जो
एकटक उसी को देखा करता है।।

लिफ्ट मांगती है जब कोई नारी
दिल में खुशी होती है उसे
जाना होता है जहां उसे भूलकर
पहले घर तक छोड़ आता है उसे।।

किसी को तो पसंद आएगा, घूमता
रहता है आज भी इसी आस में वो
समझ बैठा है खुदको शीतल जल
मिलेगा कोई तो उसे, जो प्यास में हो।।

मिलती है कोई लड़की जब बात
करने का मौका ढूंढ ही लेता है वो
कुछ और नहीं तो पहली मुलाकात में
घर का पता तो पूछ ही लेता है वो।।

पहली मुलाकात खत्म होने से पहले
अगली मुलाकात का बहाना ढूंढ लेता है वो
कोई शक भी नहीं करता उसपर
धीरे धीरे दिल में जगह बना लेता है वो।।

है इंसान बहुत अच्छा लेकिन
थोड़ा सा चिपकू है वो
अरमानों ने बहकाया है उसके
वैसे तो भोला भाला है वो।।

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Author
कवि एवम विचारक
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