Skip to content

” ——————————————- कैसे काटें रतिया ” !!

भगवती प्रसाद व्यास

भगवती प्रसाद व्यास " नीरद "

गीत

August 19, 2017

नज़र चुराकर नज़र मिलाते , होते हैं जो छलिया !
खेल खेल में हंसी चुरा ले , होते जो मनबसिया !!

हंसी हंसी में ठग जाते हैं , ऐसे हैं सौदाई !
आंखों से नीदें ले उड़ते , कैसे काटें रतिया !!

मीठी यादें जुड़ जाती हैं , अलग थलग पड़ जाते !
आंखें खोयी खोयी रहती ,कान धरें ना बतियाँ !!

यहाँ वहाँ की लोग सुनाते , हम खुद में ही डूबे !
भूले से कोई नाम तेरा ले, धड़क जाए है छतियाँ !!

रोग प्रेम का गले पड़े है, जाने अनजाने से !
कड़वे घूंट कभी मिलते हैं , कभी मिले सरबतिया !!

दिल हारे सब कुछ हारे हैं , ऐसी हार मिली है !
जीत हार में ढूंढें हम भी , ऐसे हैं हर्षितिया !!

बृज व्यास

Share this:
Author
भगवती प्रसाद व्यास
एम काम एल एल बी! आकाशवाणी इंदौर से कविताओं एवं कहानियों का प्रसारण ! सरिता , मुक्ता , कादम्बिनी पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन ! भारत के प्रतिभाशाली रचनाकार , प्रेम काव्य सागर , काव्य अमृत साझा काव्य संग्रहों में... Read more

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग से अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

साल का अंतिम बम्पर ऑफर- 31 दिसम्बर , 2017 से पहले अपनी पुस्तक का आर्डर बुक करें और पायें पूरे 8,000 रूपए का डिस्काउंट सिल्वर प्लान पर

जल्दी करें, यह ऑफर इस अवधि में प्राप्त हुए पहले 10 ऑर्डर्स के लिए ही है| आप अभी आर्डर बुक करके अपनी पांडुलिपि बाद में भी भेज सकते हैं|

हमारी आधुनिक तकनीक की मदद से आप अपने मोबाइल से ही आसानी से अपनी पांडुलिपि हमें भेज सकते हैं| कोई लैपटॉप या कंप्यूटर खोलने की ज़रूरत ही नहीं|

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you