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कैसे इंसान हो कि हर बात पे हँस देते हो??

Dr.rajni Agrawal

Dr.rajni Agrawal

कविता

July 16, 2017

कैसे इंसान हो कि हर बात पे हँस देते हो??
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कभी खुद को भुला गैरों के लिए हँस देते हो
कैसे इंसान हो कि हर बात पे हँस देते हो?

बेवफ़ा यार ने कितना रुलाया दिल को मेरे
एक तुम हो कि सियाह रात पे भी हँस देते हो?

उठ रहा दिल से धुआँ औ जल रही आँखें मेरी
और तुम बेवफ़ा सौगात पे भी हँस देते हो?

ऐसे परेशाँ तो कभी तुम न थे मेरे यारा
जलते अरमान भुलाने के लिए हँस देते हो।

चल दिए छोड़ के दुनिया से छिपा हसरत अपनी
कैसे तुम हो सजी मरियत पे भी हँस देते हो?

याद करके तुम्हें रोती रहेगी दुनिया हरदम
कैसे तुम हो जो ना होकर भी हँस देते हो?

डॉ. रजनी अग्रवाल “वाग्देवी रत्ना”
संपादिका-साहित्य धरोहर
महमूरगंज, वाराणसी (मो.-9839664017)

Author
Dr.rajni Agrawal
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न"... Read more
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