कविता · Reading time: 1 minute

कैसे आयी होगी

लूट कर एक मासूम की इज़्ज़त
तुम्हे नींद कैसे आयी होगी ,
अगर वो चिल्लाई होगी …तुम्हे अपनी बेटियां तो याद आयी होगी
इंसानियत की हवस तोड़ कर ..खुद को शेर समझने वाले
तुम जालिमो को इतनी हिम्मत कहा से आयी होगी
वो तड़पती रही तुम्हारे सामने जिंदगी को लेकर
थोड़ी सी तो दिल में रहम आयी होगी
तुम इतने बेशर्म कैसे हो गए जालिमो ,
तुम्हारे माँ बाप ने शायद ऐसी तालीम दिलायी होगी ।
तुमने तड़पा कर उन नन्ही बेटियो को …
अपनी बेटियों से आँख कैसे मिलायी होगी ।

✍🏻 :- हसीब अनवर

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