कविता · Reading time: 1 minute

कैसी ये शाम है…?

कैसी ये शाम है, क्या इसका नाम है…?
कल तक तो था कश्मीर का दर्द, आज तुर्की दिखता शमशान है…!

फ्रांस का जख्म अभी सूखा भी नहीं था…..
पाकिस्तान में मच गया घमासान है….
मॉडल बहन की लोकप्रियता पचा नहीं पाया भाई
बेटियों के लिए धरती जन्नत नहीं, नरक का फरमान है….

सुना है रात होने वाली है…अब किस जख्म का अरमान है….
क्यों नहीं समझते जुर्म करने वाले….दुनिया मुहब्बत का पैगाम है….

जब से हुकूमत की लत लगी है
तब से शायद हर कोई हैवान है….

कैसी ये शाम है, क्या इसका नाम है…?
कल तक तो था कश्मीर का दर्द, आज तुर्की दिखता शमशान है…!

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