गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

के टूटकर बिखरे हम यहाँ उसी के लिए

चला गया वो हमें छोड़ कर किसी के लिए
के टूट कर बिखरे हम यहाँ उसी के लिए

सकुन दिल का जो मेरे चला गया लेकर
तड़प रहा दिल मेरा उस अजनबी के लिए

न मुझको जीने देती है जमाने की बातें
मै जी रही हूं हक़ीक़त में आप ही के लिए

कभी खुशी में कभी ग़म में जी रहे थे हम
के छोड़ दी हर खुशी ये दोस्ती के लिए

करूं मुहब्बत कैसे किसी से मैं यारों
तड़प रहा दिल मेरा है आशिकी के लिए

हैं आस मुझको कँवल तुम न हार मानोगी
दिखाये क्यो अश्क अपनी तशनगी के लिए

3 Likes · 1 Comment · 204 Views
Like
You may also like:
Loading...