कविता · Reading time: 2 minutes

कृष्ण लीला-जब पकड़ी गई माखन चोरी

लीला उस कान्हा की
आओ तुमको सुनाते है
ग्वाल बालों संग मिलकर
देखो कैसी लीला रचाते है।।

सखाओं संग छुपकर
पेड़ पर आज मोहन ने
गुलेल से ग्वालिनों की
मटकियां फोड़ी मोहन ने।।

दौड़ी आई देखकर ग्वालिनें
भाग गए सारे साथी और
कन्हैया अकेले पेड़ पर रह गए
आज कन्हैया जी पकड़े गए।।

ग्वालिनों ने जब पूछा क्यों
फोड़ा है हमारी मटकियों को
कहा कन्हैया ने ये सच नहीं
भाग गए है वो जिन्होंने
फोड़ा तुम्हारी मटकियों को।।

कान्हा की बात पर उनको
ज़रा भी यकीन नहीं आया
मासूम कान्हा पर उनको
तनिक भी तरस नहीं आया।।

गिरा हुआ माखन कान्हा के
चेहरे पर फिर लगाया
इतने में भी सुकूं नहीं आया तो
बांधकर यशोदा मैया के पास लाया।।

यशोदा मैया को सारी कहानी सुनाई
सुनकर यशोदा मैया भी गुस्से में आई
कान्हा को फिर पूछा, क्या ये सच है
जो कहानी ग्वालिनों ने है सुनाई।।

कान्हा जी बन गए भोले,
और बोले मैया से कि झूठ
कह रही है ग्वालिनें सारी
मैं तो दिनभर था दाऊ के संग
पहले भी कहा है तुमसे, मुझे
तंग करती है गोकुल की नारी।।

मैया तो मैया है सब जान गई थी
कान्हा के झूठ के रंग पहचान गई थी
फिर ग्वालिनों से क्षमा मांग कर
उनका नुकसान भरने को मान गई थी।।

मैया कान्हा पर गुस्से हो गई थी
बोली इसे आज दूंगी ऐसी सज़ा
काल कोठरी में बंद करूंगी
फिर आएगा इसे असली मज़ा।।

सिखाऊंगी आज कन्हैया को मैं सबक
फिर कभी ना करेगा वो ऐसी गलती
ग्वालिनें मिन्नतें करने लगी यशोदा से
मत करो ऐसा हो जाती बच्चों से गलती।।

यशोदा जी नहीं मानी बिलकुल भी
ले गई फिर कन्हैया को वो कालकोठरी में
कन्हैया बोले लगता है डर अंधेरे से मैया
मैया बोली पूरी रात रहोगे कालकोठर में।।

मैया तो अभी भी गुस्से में लग रही थी
थोड़ी दूर ही उसको एक छड़ी मिली थी
पूछा कन्हिया ने क्यों उठाई है छड़ी
मैया बोली तुझे मारने के लिए उठाई है छड़ी।।

फिर एक लीला प्रभु ने रच डाली
बोले उनके पांवों के पास से
गुज़रा है अभी एक काला सांप
डर गई यशोदा बोली कहां है सांप
मैया ने जैसे ही खोला दरवाज़ा
बाहर फन उठाए खड़ा था एक काला सांप।।

डर गई थी मैया देखकर काला सांप
बोली रोते हुए, मैं सांप के साथ छोड़ने
वाली थी रात भर अपने कन्हैया को
कन्हैया को देखते ही सांप लुप्त हो गया
और मैया ने गले लगा लिया फिर कन्हैया को।।

🙏🙏🙏

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