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कृष्ण की माया

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कैसा है ये कृष्ण की माया,
हर गोपी संग कृष्ण की छाया।
जोड़ी युगल बांधे प्रीत की धागा,
राधा – कृष्णा, कृष्णा – राधा।

मुग्ध मगन बासुरी की धुन पर
झूम रहा पूरा वृन्दावन सारा।
रात है आधी, चाँद है आधा,
नाचे कृष्णा नाचे संग में राधा।
राधा – कृष्णा,कृष्णा – राधा।

छम-छम नाच रहे हैं गैया,
कृष्ण की धुन पर ता-ता थैया।
नाचे मोर ,नाचे पपीहा,
नाच रहे है गोपी जन सारा।
राधा – कृष्णा, कृष्णा – राधा।

नाच रहे हैं ग्वाल ग्वालन,
नाच रहा है पूरा उपवन।
नाच रहा है चंद्र किरण,
कृष्ण ये कैसा जादू डाला।
राधा – कृष्णा,कृष्णा-राधा।

पनघट तट झूमे कदंब,
नाच रहे हैं यमुना की तरंग।
कितना रमणीय कृष्ण की माया
हर गोपी संग कृष्ण की छाया।
राधा – कृष्णा,कृष्णा – राधा।
????—लक्ष्मी सिंह

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लक्ष्मी सिंह
लक्ष्मी सिंह
नई दिल्ली
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