कृष्ण कन्हैया

किशन कन्हैया , बंसी बजैया ।
ठुमक ठुमक चलें, रास रसैया ।
खा कर माखन कहते थे तुम ।
मैं नही खाया ,मोरी मैया
नाग कालिया के सर पर तुम ।
नाच करे थे , ता ता थैया ।
कर न सका कोई बाल भी बांका ,
गोकुल पर थी तुम्हरी छैया ।।
छोड़ गए जब तुम गोकुल को ,
कान्हा कान्हा बोली गैया।
द्रौपदी के रक्षक नंदलाला ।
चीर बढ़ाये लाज बचैया
इस युग में भी तुम आ जाओ ।
पार करो इस देश की नैया ।।

सुमीत श्रीवास्तव
कानपुर

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