कुर्ता भले सफेद...जोगीरा सा रा रा रा

कुर्ता भले सफेद…जोगीरा सा रा रा रा
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नेता नोटों की गड्डी से, खेल रहे हैं खेल।
जीवन अपना फीका फीका, मिले नमक ना तेल-
जोगीरा सा रा रा रा।।

अक्सर क्यों पा जाते कुर्सी, दिल के काले चोर।
भोली-भाली जनता रोती, होकर भावविभोर-
जोगीरा सा रा रा रा।।

अव्वल दर्जे का है झूठा, कुर्ता भले सफेद।
उसकी बातों में मत आना, जिसमें लाखों छेद-
जोगीरा सा रा रा रा।।

मर्यादा को देखो भाई, ये खूंटी पर टांग।
देश चलाते नेता जैसे, पी पी करके भांग-
जोगीरा सा रा रा रा।।

हरी-भरी साड़ी में साली, लड़ने चली चुनाव।
नेताओं की भाषा बोले, दिल को देती घाव-
जोगीरा सा रा रा रा।।

खा खा कर के रिश्वत देखो, अधिकारी हैं लाल।
पीला पीला मुखड़ा अपना, पिचके-पिचके गाल-
जोगीरा सा रा रा रा।।

कैसे खेलें महँगाई में, भाई रंग-अबीर।
कैसे खाएं हलुआ पेठा, पूआ पूड़ी खीर-
जोगीरा सा रा रा रा।।

– आकाश महेशपुरी
दिनांक- १०/०२/२०१९

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