कुत्ते भौंक रहे हैं हाथी निज रस चलता जाता

कुत्ते भौंक रहे हैं हाथी निज रस चलता जाता|
कौन मूर्ख है आप बताओ किसका बल से नाता?

श्वान कह रहा मेरे डर से भाग रहा है मोटा|
मार झपट्टा खा जाऊँगा समझ न मुझको छोटा|
तुम बतलाओ किस को समझें अहंकार का छाता|
कुत्ते भौंक रहे हैं हाथी निज रस चलता जाता|

बीस कदम तक भौंक कह रहे किया उसे आहत है|
समझ रहे हैं सिंह स्वयं को कुत्तों की यह लत है|
कहिए श्री मन्, कौन भ्रमित है, किसे कहूँ मैं ज्ञाता|
कुत्ते भौंक रहे हैं हाथी निज रस चलता जाता|

पूँछ हिला कर बैठ गए हैं अपने घर के आगे|
राष्ट्र विजेता बने बताओ या फिर भ्रम के धागे|
आप कहाँ हो निज को जानो ज्ञानी या अज्ञाता|
कुत्ते भौंक रहे हैं हाथी निज रस चलता जाता|

बृजेश कुमार नायक
“जागा हिंदुस्तान चाहिए” एवं “कौंच सुऋषिआलोक” कृतियों के प्रणेता

निवास -सुभाष नगर कोंच

“जागा हिंदुस्तान चाहिए”कृति का गीत
पेज-72

-आईएसबीएन-978-93-82340-13-3
-रचनाकार-बृजेश कुमार नायक
-“जागा हिंदुस्तान चाहिए”कृति प्रकाशित होने का वर्ष-2013
-प्रकाशक-जे एम डी पब्लिकेशन नई दिल्ली
01-05-2017

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