कुण्डलिया · Reading time: 1 minute

कुण्डलिया (समसामयिक)

मोदी के फ़रमान पर ,बंद हुए जो नोट ।
यू.पी.मेें फीके पड़े , अग्र चुनावी वोट ।
अग्र चुनावी वोट, शिकस्त़ जो हमने खाई ।
तिल-तिल सड़ने लगी,हमारी काली सभी कमाई ।
‘ईश्वर’ देखे आज तमाश़ा, बड़े-बड़ों के मुँह लटके हैं ।
अहंकार जिनका पेश़ा था, उल्टे पाँसे में अटके हैं ।
-ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
कवि एवं शिक्षक।

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