कुण्डलिया

हिन्दू मुस्लिम सिक्ख का, जो करते हैं बात।
राष्ट्र द्रोह करते यहीं, यही करेंगे घात।।
यही करेंगे घात, रखो इनसे बस दूरी।
लानत भेजो यार, इन्हे बस पूरी – पूरी।।
कहे सचिन कविराय, सभ्यता धर्म का बिंदु।
मानवता है धर्म, नहीं हम मुस्लिम हिन्दू।।

काम काज का ध्यान रख, करना मत का दान।
धूर्त लुटेरों का सभी, बंद करो सम्मान।।
बन्द करो सम्मान, ये दिमक देश को खाये।
मारो जूते चार, दरिन्दा जब दिख जाये।।
मत देते क्षण भ्रात, रखो बस ध्यान आज का।
हुए वर्ष जो पाँच , उसी बस काम काज का।।

✍️पं.संजीव शुक्ल ‘सचिन’
मुसहरवा (मंशानगर)
पश्चिमी चम्पारण, बिहार

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