.
Skip to content

कुण्डलिया छन्द

ATUL PUNDHIR

ATUL PUNDHIR

कुण्डलिया

May 18, 2017

कोई तो कानून हो, है भारी अपराध
मच्छर आदम खूँ पियें, ले ले कर के स्वाद
ले ले कर के स्वाद, करें कानों में उँगली
रगड़ रगड़ खुजलात, मिटे ना लेकिन खुजली
कहत अतुल कविराय, नींद आँखों से खोई
मच्छर पुलिस बुलाय, पकड़वा दो अब कोई

अतुल पुण्ढीर

Author
ATUL PUNDHIR
Recommended Posts
गीत- ये पहचान भी ले ले
गीत- ये पहचान भी ले ले ●●●●●●●●●●●●● ये दिल जो तोड़ डाला है तो अब ये जान भी ले ले है घर जो कर दिया... Read more
बस दिल से हो जा गोरी
लगा ले क्रीम, पाउडर और सारे कोसमेटिक अपने चेहरे को रंगने में निखार ले अपने योवन को मल मल कर गुसलखाने में पल भर की... Read more
कुण्डलिया
मँहगाई नकदी रहे, होती नहीं उदार | इसका कब शनिवार या, होता है रविवार || होता है रविवार, जहाँ इक छुट्टी का दिन, वहीँ पसारे... Read more
जिसके गुट में एकता.....: छंद कुण्डलिया
शाश्वत कुण्डलिया- गुटबंदी में है बँटा, भारत राज समाज. जिसके गुट में एकता, चले उसी का राज. चले उसी का राज, वही सब पर हो... Read more