कुण्डलियाँ

रोज बढातीं नारियाँ पुरुषों का —*सम्मान ।
फिर भी ये क्यों सह सह रहीं, पग पग पर अपमान ।।
पग पग पर अपमान, पीर न जाने कोय।
दुर्गा शारद पार्वती, नारी ही सब होय।।
कह “प्रीतम” माँ बहन में , स्वर्ग व देवी खोज।
करता है सम्मान अगर, दया करें प्रभु रोज।।

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